उत्तराखंड में बेटियों के लापता होने की समस्या: बढ़ती चिंता और सरकारी कदम

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देहरादून, 18 सितंबर 2023: उत्तराखंड, भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक राज्य है, जिसे अपनी प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वतीय स्थलों के लिए प्रसिद्धा है। हालांकि यहाँ के शांतिपूर्ण और प्राकृतिक वातावरण दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक मोहक स्थल है, वही यहाँ की बेटियों के लापता होने की घटनाओं के साथ एक चिंताजनक बात है। बीते पांच माहों में, इस छोटे से राज्य में बेटियों के लापता होने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके साथ ही 109 किशोरों के भी लापता होने की शिकायतें आई हैं।

बेटियों के लापता होने के पीछे का पृष्ठभूमि

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2023 के जनवरी से मई माह तक, 59 बालिकाओं का पता अब तक नहीं चल पाया है, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। इसके परिणामस्वरूप, उनके परिजनों के बीच चिंता और उदासी का माहौल है कि वे कहां हैं और किसी भी कठिनाइयों में हो सकती हैं।

जिलों के आंकड़े:

  • हरिद्वार जिले से 95 बालिकाएं और देहरादून से 80 बालिकाएं लापता हो चुकी हैं।
  • कुमाऊं के क्षेत्र में, ऊधमसिंह नगर से 49 और नैनीताल से 17 नाबालिग बेटियां लापता हुई हैं।
  • पिथौरागढ़ जिले में सबसे अधिक 15 बेटियां लापता हैं।

सरकार के प्रतिनिधि का दिलेम्मा:

स्थानीय और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देने की बात कही है और बच्चों की सुरक्षा में सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाने का आलंब किया है। इसके तहत, उन्होंने बेटियों के लापता होने की रोकथाम के लिए कई प्रावधान बनाए हैं और उन्होंने सरकारी अधिकारियों को भी सहायक होने के लिए उत्साहित किया है।

समाजिक संगठनों का सहयोग:

समाज में बदलाव लाने के लिए सरकार के साथ, सामाजिक संगठनों ने भी मिलकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वे बच्चों के लिए साक्षरता की शिक्षा, सुरक्षित रहने के तरीके, और विभिन्न सामाजिक योजनाओं के साथ सरकार को सहयोग कर रहे हैं।

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समापन:

उत्तराखंड में बेटियों के लापता होने की समस्या के बढ़ते मामलों ने सभी साथी नागरिकों के लिए चिंताजनक है, और यह समय है कि सरकार, समाज, और व्यक्तिगत स्तर पर हम सभी मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढें। बेटियों के सुरक्षित और सुरक्षित रहने के हक को सशक्त करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है, और यह उत्तराखंड के नागरिकों की जिम्मेदारी भी है।


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