अल्मोड़ा में दशहरा पर इस बार रावण परिवार के 10 पुतलों का होगा दहन

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उत्तराखंड के सांस्कृतिक शहर अल्मोड़ा में हर साल आयोजित होने वाले प्रसिद्ध दशहरा महोत्सव के इस बार काफी ख़ास होने की तैयारियाँ हो रही हैं। इस वर्ष, केवल 10 पुतलों का ही दहन किया जाएगा, जबकि पिछले साल इस महोत्सव में 22 फीट से अधिक ऊंचे पुतले दिखाए गए थे।

Almora Rawan Dahan News

हर साल दशहरा पर, अल्मोड़ा में रावण परिवार के पुतलों का जुलूस निकलता है, लेकिन इस बार प्राशासन ने पुतलों की अधिकतम ऊंचाई को 14 फीट तक सीमित किया है, और दहन के लिए केवल 10 पुतलों की अनुमति दी है।

दशहरा समिति भी इस वर्ष इससे अधिक पुतलों के दहन के लिए पंजीकरण नहीं करेगी। पुतलों का दहन एसएसजे विश्वविद्यालय या सिमकनी मैदान में आयोजित किया जाएगा, और इसके लिए प्रशासन, पुलिस, फायर सर्विस, नगरपालिका, और दशहरा समिति के पदाधिकारी संयुक्त निरीक्षण करेंगे।

इस बड़े पर्व के लिए तैयारियाँ अब शुरू हो चुकी हैं, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि पुतलों का दहन सुरक्षित और सांविदानिक तरीके से हो, एक विशेष योजना बनाई जा रही है।

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दशहरा पर रावण के पुतले क्यों फूँके जाते हैं: एक ऐतिहासिक परंपरा

दशहरा, भारतीय हिन्दू परंपराओं में महत्वपूर्ण होली का त्योहार है, जिसे पुरे उत्तराखंड और भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन, लोग असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव करते हैं, और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है भगवान श्रीराम के द्वारका यात्रा के दौरान रावण का वध करना। दशहरा के महत्वपूर्ण रूप से मनाने वाले प्रसिद्ध उत्सवों में से एक है रावण के पुतले का दहन, जिसे कई जगहों पर रामलीला के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाता है।

रामायण की कथा और रावण का अंत

रामलीला का प्रस्तुतिकरण रामायण की महत्वपूर्ण कथा पर आधारित होता है, जिसमें भगवान श्रीराम के द्वारका यात्रा के दौरान रावण का वध विस्तार से दिखाया जाता है। रावण, लंका का राजा और दुर्योधन की तरह दुराचारी था, और उसने भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का हरण किया था। इसके बाद, भगवान श्रीराम, भगवान हनुमान और उनके भक्तों ने लंका पर आक्रमण किया और युद्ध में रावण को मार डाला। इससे भगवान श्रीराम और माता सीता की मिलन की खुशी का उत्सव मनाया गया, जिसे हम आज दशहरा के रूप में मनाते हैं।

रावण के पुतले का दहन का आयोजन

रावण के पुतले का दहन दशहरा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कई जगहों पर आयोजित किया जाता है। इसमें आदिकावि वाल्मीकि की रामायण की कथा के आधार पर एक बड़ा रथ या पुतला बनाया जाता है, जिसको रावण का पुतला सिंहनाद के साथ निकाला जाता है। इसे आमतौर पर लोगों के साथी रावण के पुतले के साथ देखने का आनंद लेते हैं और फिर उसे दहन कर देते हैं।

सामाजिक संदेश

रावण के पुतले का दहन एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी प्रस्तुत करता है। यह त्योहार हमें असत्य की पराजय और सत्य की विजय की महत्वपूर्ण पाठ देता है। रावण का पुतला जलते हुए हमें अन्धकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत देता है और बुराइयों को पराजित करने की प्रेरणा प्रदान करता है।

विभिन्न रूप में मनाया जाने वाला दशहरा

भारत के विभिन्न हिस्सों में दशहरा को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। उत्तराखंड में दशहरा महोत्सव को कुलु के राजा का आगमन माना जाता है, जब राजा कुलु के राजमहल में आकर पुतले के दहन का आयोजन करते हैं। यहां पर दशहरा का त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है और इसमें बड़ी धूमधाम के साथ रावण के पुतले का दहन शामिल है।

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समापन शब्द

दशहरा का यह पारंपरिक रूप भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह हमें सत्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। रावण के पुतले का दहन एक प्राचीन परंपरा है जो हमारे इतिहास को सजाती है और असत्य के पराजय की महत्वपूर्ण संदेश देती है।


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